Saturday, 11 December 2010

कार्रवाई तंत्र कमजोर

दैनिक जागरण नव.2010
नई दिल्ली भ्रष्टाचार को जारी रहने देने का एक नायाब तरीका, निगरानी और कार्रवाई तंत्र को कमजोर कर दिया जाए। केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कुछ इसी अंदाज में हो रही है। जहां एक ओर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्त्रमों समेत अन्य विभागों में बड़े पैमाने पर पूर्णकालिक मुख्य सतर्कता अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं, वहीं हजारों करोड़ के सालाना बजट वाले कई मंत्रालयों व उपक्रमों में सतर्कता अधिकारी का स्थायी पद तक नहीं है। इनमें दूरसंचार विभाग भी है, जहां 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला हुआ है। भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए देश के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में पूर्णकालिक सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) नियुक्त किए जाते हैं। इन्हीं सीवीओ के माध्यम से केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) भी इन सार्वजनिक उपक्रमों में भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करता है और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करता है। दरअसल ये सीवीओ सीधे सीवीसी के नियंत्रण में होते हैं और लगातार रिपोर्ट करते हैं। जाहिर है भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सीवीओ की अहम भूमिका होती है। लेकिन इस समय सीवीओ के कुल 92 पद खाली पड़े हैं। यानी इन उपक्त्रमों में भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने वाला कोई नहीं है। लेकिन सीवीसी के बार-बार कहने के बावजूद सीवीओ के रिक्त पदों पर नहीं भरा जा रहा है। लेकिन सीवीसी सब देखते हुए भी बेबस है। वहीं हजारों करोड़ रुपये के सालाना बजट वाले कुछ मंत्रालयों में पूर्णकालीन सीवीओ की नियुक्ति का कोई प्रावधान ही नहीं है। मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव को ही सीवीओ का काम सौंप कर सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेती है। जाहिर है मंत्रालय में काम करने वाला संयुक्त सचिव अपने मंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकता है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में घिरे संचार मंत्रालय में भी संयुक्त सचिव स्तर का एक अधिकारी सीवीओ की जिम्मेदारी संभाले हुए था, लेकिन घोटाला रोकने और जांच एजेंसियों को इनकेबारे में सतर्क करने में वह पूरी तरह नाकाम रहा। पिछले सालों में जिन दो विभागों एआइसीटीई और एमसीआइ में बड़े घोटाले उजागर हुए हैं, उनमें सीवीओ का कोई पद है ही नहीं। सीवीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन दोनों को पिछले तीन साल से पूर्णकालिक सीवीओ की नियुक्ति के लिए कहा जा रहा है, लेकिन घोटाला उजागर होने के बाद भी सीवीसी की नियुक्ति नहीं की गई है।

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